कुछ भी केहना चाहूँ
रूमानी रूह निकल आए
हर एक हसीन में
महजबीं खूब निकल आए
उन की हर बात पे
आँख से हसरत निकल आए
हाय जज्बात मेरे
खुद से ऊपर निकल आए
जां निसार है फिर से
चलो…
कुछ और सितम निकल आए
बस वसीहत में मेरी
मुअय्यन उर्दू निकल आए
कुछ भी केहना चाहूँ
रूमानी रूह निकल आए
हर एक हसीन में
महजबीं खूब निकल आए
उन की हर बात पे
आँख से हसरत निकल आए
हाय जज्बात मेरे
खुद से ऊपर निकल आए
जां निसार है फिर से
चलो…
कुछ और सितम निकल आए
बस वसीहत में मेरी
मुअय्यन उर्दू निकल आए
Rachit ji aap Hindi aur English me to achha likhte hi h…Per Urdu me bhi aapki pakad achhi h…U r unique..The best…My best friend keep it up
Zii bhar ke zii le zindagi…. Love u zindagiii…