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पिता

पिता रोटी है, कपड़ा है, मकान है पिता नन्ही सी परी का बड़ा आसमान है पिता है तो बच्चों के

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वसीहत

कुछ भी केहना चाहूँ रूमानी रूह निकल आए हर एक हसीन में महजबीं खूब निकल आए उन की हर बात

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वसीहत

कुछ भी केहना चाहूँ रूमानी रूह निकल आए हर एक हसीन में महजबीं खूब निकल आए उन की हर बात

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आहिस्ता चल जिंदगी

आहिस्ता चल ज़िन्दगी अभी क़र्ज़ चुकाना बाकी है कुछ दर्द मिटाना बाकी है कुछ फ़र्ज़ निभाना बाकी है रफ्तार में

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